Monday, September 6, 2010

क्षणिकायें

अवसरवादी
वैसे तो वे
बेपेंदी के लोटे हैं
पर आज
अवसर की
ताक में बैठे हैं |

मियां मिट्ठू
पेड़ के नीचॆ
छुपी सहमी
डरी छाया ने कहा
यह मुआं पेड़
बीच मॆं आ गया
अन्यथा मजा चखाती
उस दुष्ट सूरज को |


जमाना

जमाने पर
जमाते हैं
अभी तक धोंस
वे सारे
जमे हैं
जो जमाने से
अभी तक जम के
मसनद पर |


शुभ कामनाएं

नेताजी ने
अपने शागिर्दॊं को
होली की दी शुभकामनाएं
छेड़खानी बलात्कार एवं

घूसखोरी के सभी मामलों से
आप बेदाग बरी हो जायें
ईश्वर आपको
इतनी शक्ती दे
कि आप कानून की
धज्जियां उदड़ाएं
और न्यायालयों को
अच्छी तरह सॆ
अंगूठा दिखा पाएं |


लेंड लार्ड

हमारा देश्
राशन कार्ड है
धरती का
बहुत बड़ा वार्ड है
जमीन पर
भूखा सॊता है
किन्तु जमीन सॆ
जुड़ा है वह
इसलिये लेंड लार्ड है |


उनका हिन्दी प्रॆम

पहिले उन्होंने
भरपेट लंच खाया
फिर हिन्दी दिवस मनाया
खूब भाषण हिन्दी पर दिये
अगले कार्यक्रम में
तीन हिन्दी शालाओं को
अंग्रेजी शालाओं में
परिवर्तित कराया |







    

ग्यान

ग्यान मेरा
काम किसी न आया

क्योंकि मैंने
अपने आपको
विग्यापन बनकर
दिखाया नहीं


मेरा दुख
काश मेरी पत्नी
रत्नावली होती
मेंने भी एक
रामायण लिख 
ली होती


संकीर्ण स्वायत्तता

पाटों में दो फँसी
सर्पिल टूटती सी नदी
अचानक विकराल
उठती हो है
नहीं थमती बाहों में
नहीं रुकती राहों मॆं
एकता ने पकड़ा
अखंडता ने भुजाओं जकडा में
पर पकडन जकडन और
सबसे बाहर कूदकर
वह टूटती नदी बंध गयी
पल्लू धर्म के से
वह नहीं चाहती
बहना बढ़ना
लम्बे किनारे
पेड़ों बाहुपाश के
न ही में सागर मिलना
उसे पोखर अथवा
गंदा तालाब बनना है

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