टांग मार संस्कृति
घोड़ों और गधों मॆं दुलत्ती झाड़ने की आदत होती है, इसलिये बड़े बड़े धुरंधर भी इनके पीछे खड़े होने में कतराते हैं | कहते हैं कि अफसर की अगाड़ी और घोड़े की पछाड़ी से बचना चाहिए | किन्तु जब से यूनियनबाजी का विकास हुआ है अफसर केआगे आने से कोई नहीं डरता उल्टे अफसर के आगे होकर् चापलूसी के हुनर अपनाकर लो अपना उल्लू सिध्द करने में लगे रहते हैं | हां घोड़े की पछाड़ी अभी भी खतरनाक ही है, जाने कब दुलत्ती झाड़दे और आप चारों खाने चित्त हो जायें | अभी कुछ सालों से आदमी भी दुलत्ती झाड़्ने में निपुण हो गया है | चूंकि हम हिन्दी दिवस मना मना कर हिन्दी में अपनी अक्ल का लॊहा मनवा चुके हैं दुलत्ती मारने के बदले हम टांग मारना सीख गये हैं | सीधे सादे आदमी को टांग मारना हमारी संस्कृति हो गयी है | मेरे विचार से इसमें टांगों का कोई दोष नहीं है | जब टागों के पास कोई काम नहीं होगा तो वे मारने का ही पुण्य कर्म करेंगीं |
अब आप ही देखिये आज से पचास साल पहिले टांगें चलने के काम आती थीं और चल चल कर इतनी तो थक जाती थीं कि वे किसी को मारने लायक नहीं बचती थीं | अरे साहब हमारे चच्चू ने तो सायकिल खरीदने के बाद भी सालों सायकिल नहीं चलाई | हां सायकिल को पैदल घसीटने में उन्हें बड़ा आन्नद आता था | रास्ते में मिलने वालों से वह यह बताना नहीं भूलते थे कि यह सायकिल उन्होंनें खरीदी है | किन्तु जब से लोग मोटर सायकिलों कारों और मोंटरों में घूमने लगे हैं टांगों के पास कोई काम नहीं बचा | कमबख्त लिफ्ट ने तो क्रांति ही ला दी | बहुमंजिला बिल्डिंग में चढने में भी टांगों का कोई उपयोग नहीं होता इसलिये टांगें बिल्कुल बेकार हो गई हैं | कहते हैं खाली दिमाग शैतान का घर होता है इसलिये फुरसती टांगें धड़ल्ले से मारने के काम आने लगीं |
एक अफसर दूसरे अफसर के काम में टांग मारता है | नेता, नेता के काम में टांग मारता है | मंत्री, मंत्री के काम में टांग मारता है | यंत्री, यंत्री के काम में टांग मारता है | पक्ष, विपक्ष के काम में टांग मारता है | बीवी मियां के काम में है टांग मारती | हर जगह टांग मार स्थिति की है, या न हो की का गोया टांग शरीर अंग होकर चाकू छुरी बन्दूक गोली |
अब है दो कदम चलना मुश्किल, आप नहीं कि किसी ने चले टांग मारी | आपकी टांगें मजबूत हैं, एफिल टावर की तरह तब तो ठीक है वरना आप् मुंह के बल गिर जायेंगे | जिनकी टांगे कमजोर हैं और जो दूसरों को टांग नहीं मार सकते वे जयपुर से आर्टिफिशियल टांगें मगाकर दूसरों को टांगें मार रहे हैं | घर के लोग भी इस टांग मार स्पर्धा में नहीं पीछे रहते | कल अब की ही बात है, से कहा मेंने श्रीमतीजी "डार्लिंग बड़ा अच्छा मौसम कुछ है दो भजिये वजिये खिला |"
भरोसा नहीं नहीं क्या हो तो तेल मिलावटी लफड़े मॆं पड़ जायेंगे | बीमार होना है क्या?
के और उन्होंने हमारे पर दी भजिये खाने नेक इरादों टांग मार | की हो रही है जहां देखो वहां टांग मारने स्पर्धा | रहा है तो कोई कोई हिन्दुस्तान टांग मार महिला को पास में पकिस्तान समझोते में रहा है आरक्षण बिल कराने टांग मार |
अब तो लोग टांग मारने की कला से भी आगे निकल गये हैं | वे फटे में टांग डालने लगे हैं | उन्हें इसी में आन्न्द आता है | एक मूर्ख ने एक विद्वान से कहा कि आपके फटे कोट में से विद्व्ता बाहर झांक रही है, तो विद्वानजी ने कहा " नहीं मूर्खता भीतर झांक रही है | "लोग आत्म मन्थन करें टांग मार का खेल बहुत हो गया अब टांगों से केवल चलने का काम करें | देश को आगॆ बढ़ाने के लिये" तुझको चलना होगा तुझको चलना होगा | "
मृतक आमरण अनशन
आज सुबह मेरे खास खबरची ने खबर दी कि गोलूराम चौराहे पर कुछ मृतक आमरण अनशन पर बैठे हैं | खबर सनसनीखेज एवं चौंकानेवाली थी | मृतक और आमरण अनशन पर बात समझ में नहीं आई | यदि उन्हें आमरण अनशन पर बैठना ही था तो यमराज के दरबार में बैठते | यहां धरती पर उनके इस प्रकार बैठने से तो ब्रह्माजी के संविधान गड़बड़ा जायेंगे | फिर यहां पर अभी बहुमत वाली सरकार नहीं है जिसके द्वारा संविधान संशोधन का विधेयक पारित किया जा सके |
मैं एक खोजी पत्रकार हूं | पैंयां पैंयां चलकर मैं गॊलू राम चॊराहे पर पहुंच गया | चॊराहे के पास एक मंच पर तीन व्यक्ति लुंगी बनियान पहिने बैठै थे | बीस पच्चीस लोगों की भीड़ ने मंच को घेर रखा था | दो पुलिस वाले भीड़ को डंडा दिखाकर दूर हटा रहे थे, जरा हवा आने दो मृतकों को यदि आक्सीजन नहीं मिली तो वे मर जायेगें मंच पर एक बड़ा बैनर लगा था जिस पर लिखा था "हम जिंदा हैं हम मरे नहीं हैं यदि हमॆं जिंदा नहीं माना गया तो हम भूखे प्यासे रह कर जान दे देंगे | "
मैंनें एक परिचित पुलिस वाले से इजाजत ली एवं मृतकों के पास बैठ गया | मैंनें डरते डरते एक मृतक से पूछा आदरणीय मृतकजी आप तो जिंदा हैं फिर क्यों अपने आप को मरा बता रहे हैं | मृतक भड़क गया | यही तो मैं कह रहा हूं कि मैं जिंदा हूं पर बेदर्द जमाने के लोग कहां मानते हैं | मेरे चालू चाचा ने मुझे मृतक घोषित कर मेरे बाप की सम्पूर्ण् सम्पत्ति हड़प ली है | पटवारी कहता है कि मैं मर चुका हूं | इतना कहकर वह रोने लगा | मैंने उसे समझाया मरे हुये लोग तो बहादुर होते हैं हिम्मत से काम लो ईश्वर ने चाहा तो जल्दी जिन्दा हो जाओगे |
तुम नगर पालिका नहीं गये वहां तो तुम जिन्दा होगे मैंने प्यार से पूछा |
गया था किन्तु नगरपालिका अधिकारी कहता है कि तुम चार माह पहिले मर चुके हो |
मुझे बड़ा गुस्सा आया बहुत ढीला ढाला मृतक है अरे तो तुम्हें तहसीलदार के यहां जाना था जिन्दा होने के सबूत पेश करना थे |
बड़े साहब मैं वहां भी गया था मृतक रुहांसा होकर बोला किन्तु उसनॆ डांटकर भगा दिया | कहता है तुम नीचे से मरकर आये हो थ्रू प्रापर चेनल मरकर आये हो पार्षद् ने तुम्हें मृतक सिद्ध किया है पटवारी ने तुम्हें मरा बताया है फिर नगर पालिका के कर्मठ् अधिकारी तक ने मरा पाया है | इतने सारे लोग थोड़ॆ ही एक साथ झूठ बोलेंगें | मैंने तहसीलदार को लाख समझाया कि मुझॆ छूकर देख लें | मैंने उसे यह् भी समझाया कि मृतक लुंगी बनियान नहीं पहनते हैं जबकि मैं दोनो वस्त्र धारण किये हूं तहसीलदार कहता है तुम डुप्लीकेट हो सकते हो जब अमिताभ बच्चन का डुप्लीकेट हो सकता है देवानन्द का डुप्लीकेट हो सकता है तो तुम्हारा डुप्लीकेट क्यों नहीं हो सकता |
तुम श्मशान नहीं गये यदि तुम अंतिम संस्कार को गये होगे तो वहां मृतक रजिस्टर में तुम्हारा नाम लिखा होगा |
वहां नाम कहां से होगा पटवारी कहता है मैं नदी मे डूबकर मरा हूं |
मैं परेशान होकर वापिस आ गया | सोच रहा हूं मृतकों को किस प्रकार जिंदा सिद्ध करुं | सुधि पाठकों के सुझाव आमंत्रित हैं |
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