नव गीत
टप् टप् टप् बूंद गिरे
टप् टप् टप् बूंद गिरे
अंतस में हूक उठे
मेघ बजे |
आमों की बगिया मॆं
है मस्ती बौराई
बरसेंगे गरज गरज
सूचना है ये आई
मत बरसो मत बरसो
कौन कहे |
झरनों की पर हर हर
मन जाता रीझ रीझ
गुन गुन करते हँसते
हरे हरे वन उपवन्
सर सर सर चले पवन
विटप हिले |
सावन रातों की में
घर सजना बिन सूना
दिवस ढोये कांधे पर
रातों दुख दूना का
मन के दीपक लगते
बुझे बुझे |
No comments:
Post a Comment